Monday, February 20, 2012

तेरी बोली

तेरी बोली कानो में मिश्री सी घोल जाती है
तेरी याद दिल में एक तूफ़ान सा चला जाती है
तेरे दूर होने का मुझे एहसास नहीं होता
जब तेरी याद मेरी आँखों में समा जाती है

यादें

क्यों आता है तेरा ख्याल, मेरी हर याद में
मुझे मालूम नहीं.....
क्यों आता है तेरा नाम, मेरी हर सांस में
मुझे मालूम नहीं.....
क्यों इतना बेबस हूँ तेरे बिना तन्हाई में
... ... मुझे मालूम नहीं.....
क्यों आता है तूफ़ान सागर की लहरों में
मुझे मालूम नहीं.....
क्यों डूबी हैं, ये आँखे तेरे दीदार के इंतज़ार में
मुझे मालूम नहीं.....
मेरे जीते तो तू न आया, आएगा तेरा पैगाम मेरी मौत में
मुझे मालूम नहीं.....
कभी तुम्हारी आँखों में निरख अपनी छवि को,
बड़ी ख़ुशी मिलती थी मेरे मन को.
पर जब आज देखता हूँ तुम्हारे नेत्रों को,
तो सोचता हूँ कौन जोड़ेगा इन टूटते दिलो को .
पर सितारा कभी मिटा सकता नहीं,
...चाँद के अस्तित्व को
समंदर कभी समेट सकता नहीं
साहिल को,
दिल मेरा दुखाया तो बहुत है,
कभी तुमने, कभी औरो ने
पर दिल मेरा कभी दुखा सकता नहीं,
तेरे दिल को.