कभी तुम्हारी आँखों में निरख अपनी छवि को,
बड़ी ख़ुशी मिलती थी मेरे मन को.
पर जब आज देखता हूँ तुम्हारे नेत्रों को,
तो सोचता हूँ कौन जोड़ेगा इन टूटते दिलो को .
पर सितारा कभी मिटा सकता नहीं,
...चाँद के अस्तित्व को
समंदर कभी समेट सकता नहीं
साहिल को,
दिल मेरा दुखाया तो बहुत है,
कभी तुमने, कभी औरो ने
पर दिल मेरा कभी दुखा सकता नहीं,
तेरे दिल को.
बड़ी ख़ुशी मिलती थी मेरे मन को.
पर जब आज देखता हूँ तुम्हारे नेत्रों को,
तो सोचता हूँ कौन जोड़ेगा इन टूटते दिलो को .
पर सितारा कभी मिटा सकता नहीं,
...चाँद के अस्तित्व को
समंदर कभी समेट सकता नहीं
साहिल को,
दिल मेरा दुखाया तो बहुत है,
कभी तुमने, कभी औरो ने
पर दिल मेरा कभी दुखा सकता नहीं,
तेरे दिल को.
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