Sunday, April 29, 2012

इश्क...

कैसा गम है, जो की जाता ही नहीं,
रहम कमबख्त को आता ही नहीं..
लोग तो और भी हैं इस जहाँ में,
मेरा दर छोड़ के जाता ही नहीं...
जुड़ा है यूँ मेरे नसीब के साथ,
और कोई इससे भाता ही नहीं..
वफ़ा की एक मिसाल तो ये भी है,
वर्ना इश्क ऐसे तो कोई निभाता नहीं..

Tuesday, April 24, 2012

तेरी तस्वीर..

गालों पर आंसुओ की लकीर बन गयी,
जैसा न सोंचा था, वैसी तकदीर बन गयी
हमने तो फिराई थी रेत पर ऊँगली,
गौर से देखा तो आपकी तस्वीर बन गयी..