कैसा गम है, जो की जाता ही नहीं,
रहम कमबख्त को आता ही नहीं..
लोग तो और भी हैं इस जहाँ में,
मेरा दर छोड़ के जाता ही नहीं...
जुड़ा है यूँ मेरे नसीब के साथ,
और कोई इससे भाता ही नहीं..
वफ़ा की एक मिसाल तो ये भी है,
वर्ना इश्क ऐसे तो कोई निभाता नहीं..
रहम कमबख्त को आता ही नहीं..
लोग तो और भी हैं इस जहाँ में,
मेरा दर छोड़ के जाता ही नहीं...
जुड़ा है यूँ मेरे नसीब के साथ,
और कोई इससे भाता ही नहीं..
वफ़ा की एक मिसाल तो ये भी है,
वर्ना इश्क ऐसे तो कोई निभाता नहीं..
Yeh Ishq Haaye ... Baithe Baithye ... Jannat dekhiye .. haan .... Bhai ....
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