Monday, May 20, 2013
Wednesday, June 27, 2012
मोहब्बत...
मोहब्बत तो मुझे हर रोज होती है...
लेकिन मेरी मजबूरी तो समझिए...
वो शख्स हमेशा वही होता है..
मेरी आँखे बंद भी होती हैं
फिर भी दीदार उसी का होता है...
Sunday, April 29, 2012
इश्क...
कैसा गम है, जो की जाता ही नहीं,
रहम कमबख्त को आता ही नहीं..
लोग तो और भी हैं इस जहाँ में,
मेरा दर छोड़ के जाता ही नहीं...
जुड़ा है यूँ मेरे नसीब के साथ,
और कोई इससे भाता ही नहीं..
वफ़ा की एक मिसाल तो ये भी है,
वर्ना इश्क ऐसे तो कोई निभाता नहीं..
रहम कमबख्त को आता ही नहीं..
लोग तो और भी हैं इस जहाँ में,
मेरा दर छोड़ के जाता ही नहीं...
जुड़ा है यूँ मेरे नसीब के साथ,
और कोई इससे भाता ही नहीं..
वफ़ा की एक मिसाल तो ये भी है,
वर्ना इश्क ऐसे तो कोई निभाता नहीं..
Tuesday, April 24, 2012
तेरी तस्वीर..
गालों पर आंसुओ की लकीर बन गयी,
जैसा न सोंचा था, वैसी तकदीर बन गयी
हमने तो फिराई थी रेत पर ऊँगली,
गौर से देखा तो आपकी तस्वीर बन गयी..
जैसा न सोंचा था, वैसी तकदीर बन गयी
हमने तो फिराई थी रेत पर ऊँगली,
गौर से देखा तो आपकी तस्वीर बन गयी..
Wednesday, March 21, 2012
बस तुम...
जब से मिला हूँ तुमसे,
दिल कही खो सा गया है..
तुम्हारी नज़रों के लहजे में,
कही अटक सा गया है..
सोचता हूँ, अगर तुम बेवफा निकले तो,
बात न करूँगा..
लेकिन इन बातों का तो,
जैसे चस्का लग सा गया है..
जब से मिला हूँ तुमसे,
दिल कही खो सा गया है..
दुनिया की जमघट में,
जो खो न सके,
तुम्हारी शोखियो में कही
खो सा गया है..
समंदर की लहरों में भी
जो डूब न सके,
तुम्हारी बातो में ये,
डूब ही गया है..
जब से मिला हूँ तुमसे,
दिल कही खो सा गया है..
दिल कही खो सा गया है..
तुम्हारी नज़रों के लहजे में,
कही अटक सा गया है..
सोचता हूँ, अगर तुम बेवफा निकले तो,
बात न करूँगा..
लेकिन इन बातों का तो,
जैसे चस्का लग सा गया है..
जब से मिला हूँ तुमसे,
दिल कही खो सा गया है..
दुनिया की जमघट में,
जो खो न सके,
तुम्हारी शोखियो में कही
खो सा गया है..
समंदर की लहरों में भी
जो डूब न सके,
तुम्हारी बातो में ये,
डूब ही गया है..
जब से मिला हूँ तुमसे,
दिल कही खो सा गया है..
Monday, February 20, 2012
तेरी बोली
तेरी बोली कानो में मिश्री सी घोल जाती है
तेरी याद दिल में एक तूफ़ान सा चला जाती है
तेरे दूर होने का मुझे एहसास नहीं होता
जब तेरी याद मेरी आँखों में समा जाती है
तेरी याद दिल में एक तूफ़ान सा चला जाती है
तेरे दूर होने का मुझे एहसास नहीं होता
जब तेरी याद मेरी आँखों में समा जाती है
यादें
क्यों आता है तेरा ख्याल, मेरी हर याद में
मुझे मालूम नहीं.....
क्यों आता है तेरा नाम, मेरी हर सांस में
मुझे मालूम नहीं.....
क्यों इतना बेबस हूँ तेरे बिना तन्हाई में
... ... मुझे मालूम नहीं.....
क्यों आता है तूफ़ान सागर की लहरों में
मुझे मालूम नहीं.....
क्यों डूबी हैं, ये आँखे तेरे दीदार के इंतज़ार में
मुझे मालूम नहीं.....
मेरे जीते तो तू न आया, आएगा तेरा पैगाम मेरी मौत में
मुझे मालूम नहीं.....
मुझे मालूम नहीं.....
क्यों आता है तेरा नाम, मेरी हर सांस में
मुझे मालूम नहीं.....
क्यों इतना बेबस हूँ तेरे बिना तन्हाई में
... ... मुझे मालूम नहीं.....
क्यों आता है तूफ़ान सागर की लहरों में
मुझे मालूम नहीं.....
क्यों डूबी हैं, ये आँखे तेरे दीदार के इंतज़ार में
मुझे मालूम नहीं.....
मेरे जीते तो तू न आया, आएगा तेरा पैगाम मेरी मौत में
मुझे मालूम नहीं.....
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