जब से मिला हूँ तुमसे,
दिल कही खो सा गया है..
तुम्हारी नज़रों के लहजे में,
कही अटक सा गया है..
सोचता हूँ, अगर तुम बेवफा निकले तो,
बात न करूँगा..
लेकिन इन बातों का तो,
जैसे चस्का लग सा गया है..
जब से मिला हूँ तुमसे,
दिल कही खो सा गया है..
दुनिया की जमघट में,
जो खो न सके,
तुम्हारी शोखियो में कही
खो सा गया है..
समंदर की लहरों में भी
जो डूब न सके,
तुम्हारी बातो में ये,
डूब ही गया है..
जब से मिला हूँ तुमसे,
दिल कही खो सा गया है..